बुधवार, 21 अक्तूबर 2009

गीत समर्पित

मिला न जिनको स्नेह किसी का ,उनको मोरे गीत समर्पित !
भँवर डालता लहरें ,
जो उतरे जीवन मे गहरे ,
आँख खुली पतझर मे
चारों ओर लगे थे पहरे !

काँटों भरा मिला पथ ,
संध्या से पहले अँधियारे ,
बाँध न पाये जिन्हें यहां पर मोहक जाल रुपहरे !
झोली भर-भर देती उडती धूल ,धूप की तेजी ,
जिनको हार मिली पग-पग पर
उनको मेरी जीत समर्पित !
*
पाँव न रुकने पाया ,
पल भर मिली न छाया ,
क्या बहलाना उनको ,
जिनकी टूटी सारी माया !

सबके लिये बीज बोने ,
सबको जीवन देने ,
तपा-तपा कर भस्म बना डाली
कंचन सी काया !
गला-गला आँसू मे जिनको पाला आघातों ने,
राग न देखे जिनने , उनको
मेरे मन की प्रीत समर्पित !
*
इसीलिये आये थे ,
उनने फूल नहीं पाये थे ,
लेकिन अपने साथ
जिन्दगी का अमृत लाये थे ,

मिला आसरा किसका
सिर पर घिरती रहीं घटायें ,
लेकिन हाथ पसार
किसी के द्वार नहीं आये थे ,
कभी देख पा सके नहीं जो ममता का सपना भी ,
जिनने मान न पाया वे मेरे आँगन मे पूजित -अर्चित !
*
!जिनके आँसू फूल बन गये
धरती की माटी मे ,
जिनकी साँसेँ धूल बनी ,
दे मधुऋतु को थाती में !

खोया तो हर बार मगर
कुछ हाथ न आया जिनके ,
किसी बहाने भी अब उनसे
दूर न जा पाती मैं !
वर्जित थे उल्लास और ङोंठों पर बेबस ताले ,
उनको ही बस उनको ये देखे-अन देखे अश्रु समर्पित !
*

1 टिप्पणी:

  1. कविता की हर पंक्ति में हर बार एक नया अभाव पाया...'अभाव' भी नहीं कहा जा सकता...koi dukh ya peeda bhi nahin......kya kahoon :(..??
    jaise ek ped hota hai..jiska ruaan ruaan parhit k liye hota hai....magar us vriksh ko bhi paani ki poshan ki prem ki aavashyakta to hoti hi hai...aapke har chhand mein.....aise hi vriksh hain......aur har chhand ke ant mein aapka hriday shabdon mein us vriksh ko uske hisse ka ni:swarth prem adhikarswaroop pradaan kar raha hai............:) waise is tarah ke ek vishay par ye ped ko poshit karne wali baat shayad Avinash ne hi mujhe kahi thi......mujhe uchit shabd nahin mile aapki kavita hetu...somain uske shabd yahan dohra diye...

    haan aapki bahut pravaah mayi kavtaon ke galiyaare se guzarkar is rachna tak aayi...so kahin kahin pravaah zaroor avruddh mehsoos hua..khatkaa....magar bhaav itne prabal the..k sab balance ho gaya.....

    aapne jis bhaav se ye kavita likhi.......us bhaav ko naman aur aapko aabhar...

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