सोमवार, 27 दिसंबर 2010

बीतते बरस लो नमन !

*


बीतते बरस लो नमन !

*

जुड़ गया एक अध्याय और ,

गिनती आगे बढ़ गई ज़रा ,

जो शेष रहा था कच्चापन ,

परिपक्व कर गए तपा-तपा .

आभार तुम्हारा बरस ,

कि

तोड़े मन के सारे भरम !

*

फिर से दोहरा लें नए पाठ,

दो कदम बिदा के चलें साथ .

बढ़ महाकाल के क्रम में लो स्थान ,

रहे मंगलमय यह प्रस्थान !

चक्र घूमेगा कर निष्क्रम ,

नये बन करना शुभागमन !

अभी लो नमन !

*
- प्रतिभा.

6 टिप्‍पणियां:

  1. नमन!
    बरस को जो बीत गया.
    नमन!
    आपकी लेखनी को जी गतिमान है...
    वीणा की धुन है इस छंद में.

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. बहुत ही सुंदर पंक्तियां हैं प्रतिभा जी

    मेरा नया ठिकाना

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  4. बहुत सुन्दर प्रतिभा जी | लाजवाब भावपूर्ण प्रस्तुति |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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